रविवार, 14 जुलाई 2013

नव पीढ़ी


प्रचंड गरमिक समय ,बच्चा सब गर्मी छुट्टी बितयबाक लेल आयल अछि. ओना  ,अनदीना त हमही दुनु गोटे रहैत छि .हमरा सबहक नियमित दिनचर्या ,संयमित भोजन आ बहुत संछिप्त दायरा रखने छी.जखन सं बच्चा सब पढ़ लिखय लेल बाहर रहय लागल ,हम सब जेना वीतरागी भय गेल छि. ने खेबाक विन्यास ,ने कत्तहु जेबाक उत्साह.पाबनियो तिहार मनेबा क उमंग नहि होइत अछि.शुरू शुरू में मारे चीज वस्तु सब बना बना क पठबैत छलिये .बाद में ओ सब मना करय लागल. आब ओ सब उम्हरके जीवनक अभ्यस्त भय गेल अछि घरक बनायल चीजक आकर्षण आब ओतेक नहि होइत छैक.ई बात हमरा तखन बुझैल जखन तीन चारि दिन रहला के बादे कहलक
जे, मम्मी हमलोग रोज रोज एक ही तरह का खाना खाते खाते बोर हो गए हैं .आज क्यों न कुछ नया बनाया जाए? ताहि पर हम कहलिये ,बौआ रे ,हमरा त ओ  रंग बिरंगक बिदेसी चीज बनब त नहि अबैत अछि ,ऐना करय, बाहरे
 कत्तहु कियैक ने खा लैत छहक ?ओ कहलक ,तुम चिंता क्यों करती हो मम्मी ,आज नास्ता हम बनाएंगे. तुम तो बस आराम से सोफे पर बैठ कर टी.वी. देखो !और हाँ !
किचन में बिलकुल मत आना .मुदा हमर ध्यान त भंसेघर दिस छल. नहि जानि छौंडा
की करैत हैत?कहियो चाहो त नहि बनब देलियैक .कही नून हाथे चिन्नी ने छू देने होए.
कहीं झरकिये ने जाए, अंततः एक घंटा क उपरांत ,प्लेट परसि क अनलक. धामे पसीने तर ,कहलक लो  फ्रेंच टोस्ट खाओ और खा के बताओ कैसा बना है? चाय भी बन गयी है ,अभी लाते हैं.हम धडफड़ाइत भनसाघर दिस गेलहुं.चूल्हा पर एक दिस अमनिया तौब 
पर अंडा बनौने छल,आ दोसर चूल्हा पर चाह बरकैत छल हम माथ पीट लेलाहूँ .अंडा के बगल में चिन्नी क डब्बा राखाल छल ,अवश्ये छुयैल हेते.तखने ओ पाछां सं आबि क हमरा बाहिं सं पकड़ी क दोबारा पुछलक बताओ तो कैसा बना है .हम कहलियैक ,बेटा आब हमरा भरोस भ गेल तोरा जीवन में भोजनक कष्ट कहियो नहि हेतहू .

मंगलवार, 4 जून 2013

एखन सुति  क  उठले छलहुं  की अँगना  सं जोर -जोर सं  ककरो बाजय  के आवाज  सुनलिये .ओतय गेला पर ,देखलिये ,बडकी बहिन खूब तमसैल छलखिन .पुछलियनि ,की बात ?कोन    कारने अतेक  तम्सैल छथिन ?ओ ,ओहिना त्मसैत कह  लाग्ल्खिन , मै  गे मै ,अहि गाम  में  डनियाही  मउगी  के कोनो  कमी नहि  छैक .सब  हमरा सब सं जरय  जाई  छैक .से हम कोना बुझलिये  त ! किछु दिन पहिने ,सुधिया  के बोखार  धेल्कै ,त ,सुधिया  माय  हमरा सं ,बोखार  नपना  (थर्मामीटर ) मांगि  क लय  गेल छल .दितीये  ने कोना ?आखिर लोको त  बुझौक  जे हमरा सब लग कोन  सब चीज  रहैत  छैक .आहां  सब केहन -केहन  चीज वस्तु  आनि  क  हमरा दैत  छियै .मुदा  ओइ मउगी  के  कारनामा देखियौ  .भरले बोखार  थर्मामीटर  हमरा  घुरौलक  अछि ! जे  की  हिनको  सब के वैह  बिमारी  भ जाई . हम हुनका  हाथ सं  थर्मामीटर लय  क कौल  लग  जा  क  जोर सं  थर्मामीटर  के झाडी  देलियैक  आ कहलियानी  हे यै  ,हम एकरा  में  भरल  सब  टा  बोखार  नाली  में  क  बहा  देलियनि  आब चिंताक  कोनो  बात नहि .तथापि  ओ कनी  काल  तक बड़बडैत  रहल्खिन .

शुक्रवार, 1 मार्च 2013

दाई रुसल छथि !

दाई रुसल छथि ! कियै रुसल छथि ?लोक कियै रुसै छैक ?कियो मनाबए तैं ने ? आई दस दिन सं ऒ रुसल छथि ,कियो ने हुनकर मनेन्हार ! असल में अहि बेर फेर हुनका बूते मोबाईल हेरा गेलनि . एक बरख पहिने सेहो हुनकर मोबाईल दिल्ली में चोरी भ गेल छलनि ,लेकिन ओहि बेर लोक हिनका कोनो दोष नहीं द क दिल्लिये वासी के गरियेलखिन .लोक सब हिनके दिलासा देल्क्नि जे जाय दियौ ,पुरने मोबाईल छलै . मुदा अहि बेर त मामला दोसर छल ,मोबाईल मंहग ,आ नब छल ! कखन हेरेलनि ओ बुझबो नहीं केलखिन जे तकलो जैतै .हिनका बड़ बात सुनय पडलनी .कहल गेलनि ,अहाँ के लापरवाही के कारण ओ वस्तु हरायल .इत्यादि .दाई अपन सफाई में कहबो केलखिन जे ,ई नहीं बुझु जे हमरा अफ़सोस नहि अछि ,मुदा कोन बाटे ओ ससरि गेलै से ठिक्के हम नहि बुझि सकलियैक . जखन लोक हिनकर कोनो बात के मोजर नहि देलकनी त ओ तमसा क कहलखिन जे आब हम अपना लग मोबाईल रखबे नहीं करब ! उम्मीद छलनि जे ,बाद में लोक सब देब्बे करत कियैक त हुनका लग मोबाईल नहीं रहने अपने दिक्कत हेतनि .मुदा ओ निराश chhathi.

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

abhgli

हम ओकरा पहिल बेर एक्क्युप्रेसर सेंटर में देखलियैक .दस -एगारह वर्षक उमरी हेतैक .ओ लड़की क चेहरा पर हरदम मुस्कान रहिते छलैक .हं जखन कियो ओकरा दिस ध्यान सं ताकैत छलै त ओ सतर्क भ मुस्कुरेनाई छोडि क गर्दन लिबा लेईत छल .ककरो सं ओकरा मतलब नहि छलैक, मुदा डाक्टर साहेब के प्रति ओकर लगाव सब गोटे बुझैत छलीयेक .ओ कखनहु हुनकर मफलर झिक लएत छल या हुनकर ओंजर उठा क अप्पन हाथ क ध रखैत छल .तखन ओ अप्पन माय दिस तकैत छल ,ओम्हर सं माय गुरैर क ओकरा दिस तकैत छलै त ओ ठामाही समान राखि दैत छल .ओकर माय के पहिरब -ओड्हब सं स्पष्ट छल की ओ धनाढ्य घरक लोग छैक .आस-पास के लोग सं निर्लिप्त ओ बेसी काल अप्पन मोबाईल में व्यस्त रहैत छली .हं कखनो काल कहि उठैत छल, डाक्टर साहेब इसे जल्दी से पॉइंट लगा दीजिये इसकी मिस घर आ के लौट जाएगी .संयोग सं एक बेर हम्मर बारी के बाद ओकरे नम्बर छलैक चूँकि हमरा कोनो हड़बड़ी नहि छल तैं हम ओकरे अगुआ देलियैक .हमर अहि योगदान सं ओ महिला प्रसन्न भेलि ,आ ओ ओहि कन्या क विषय में कहलक जे ,ओकरा तीन टा बेटिय छैक .इ सब सं छोटकी छल . दू बेटी के बाद ,जखन ओ फेर सं गर्भ धारण केलि त आई कालक रेवाज क मोताबिक ओ जाँच करोली ,जहि में कन्या भ्रूण क रिपोर्ट एलैक .से ओकरा मंजूर नही छलैक तैं ओ दवाई द्वारा गर्भपातक प्रयास केलक जे सफल नहि भेलैक .तखन ओ डाक्टर के गर्भपातक इच्छा कहलकै मुदा आब ओ संभव नहि छलै .ताहि सं ओक्कर जानक खतरा छलैक .तखन ओक्कर सासू के अप्पन बेटी मोन पड़ लई ओ विवाहक दस वर्षक बादो निःसंतान छल .तखन विचारल गेल की कियैक ने इ कन्या हुनके दय देल जाय .अस्तु जनम्तहि ओ कन्या अप्पन माय सं बिछड़ी गेल! नवजात चूँकि सुन्दर छल तैं आरम्भ में ओकरा दुलारल गेलै ,लेकिन किछुए दिन बाद दुटा एहन घटना भेलैक जे ओकर जीवन नर्क बनी गेलै .ओकर पोस माता के बेटा भय गेलैक आ ओ कन्याक हाव -भाव सं लोग के भुझा गेलैक जे लड़की क क्रिया -कलाप स्वभाविक नहीं छैक .दवाइक दुस्प्रभाव सं ओक्कर दिमाग के पूर्ण विकास नहीं भय सकलै जाही कारने ओ दस वरसक रहितो ,क्रिया -कलाप चरि बरखक नेंना सन करैत छल . संयोग सं किछु वर्षक बाद ओहि कन्याक माय अप्पन ननदि ओहिठाम गेली ,माइक नजर बेटी पर होइत कदाचार के भंपि गेल .ओ ननदि सं अप्पन बेटी के लौटाबय क गप्प कयली ,ननदि त यैह चहिते छल ओ एकरा वास्ते तुरत तैयार भय गेल .ओ पुनः अप्पन माय -बाप लग आबि गेल . मुदा कहई ने छई ,कपार संगहि जेतों .सैह ओकरा संगे भेलई .माय हक़ सं बेटी के आनि त लेलकई मुदा ओ स्नेह नहि द सकलै .लोकक या अधिकतर महिलाक ई स्वभाव होइत छैक जे ,हम अप्पन नेन्ना के मारी त मारी लोक नहि किछु करेअ . ओहि बालिकाक जीवन गाथा सुनि क मोन व्यथित भ गेल .ओकर माय डाक्टर के कह लग्लै ,आपसे इतने दिन से ईलाज करवा रहे हैं कोई फायदा नजर नहीं आ रहा है ,इसे तो रंग की भी पहचान नहीं है . डाक्टर तुरत्ते एक गोट लाल रंगक वस्तु ओकरा देखा क पुछल्खिन ,बेटा बोलो तो ये किस रंग का है ?बालिका तुरंते जवाब देलकै लाल ! माय चकिते रहि गेलैक ,लेकिन एक शब्द प्रोत्साहन के नहि बाजल भेलनि .अर्थात सब के बुझा गेलै जे ओ महिलाक लग अप्पन एहन संतानक लेल कोनों समय नहि छैक .स्पस्टे कहली जे हमरा में ओतेक धैर्य नहि अछि जे अहि पागल संग हम समय बर्बाद करब .एक टा टीचर राखि देने छियैक वैह शायद सिखौने हेते .आ जौं अहि डाक्टर बुते ठीक नहि भेलनि त हम एक्रर इलाज वेल्लोर में सेहो करेबाक विचार अछि .ओक्कर बोली में अहंकार छलै .हम अप्पन मोन में यैह सोचल्हूँ ,जे ओ कन्या के हक़ छैक से आहां नहि द सकलियै त आहां कतबो पइसा कियेअ ने खर्च करब, ओ व्यर्थे होयt.

गुरुवार, 6 सितंबर 2012

gam chalu

बहुत दिन बाद गाम गेल छलहूँ , बस पर सं उतरिते एक टा रिक्शावाला लग में आबी क अप्पन रिक्शा ठाड़ क देलक आ हिनका पुछ्ल्क्नी ,मालिक ,अहि बेर त बहुत दिन बाद एलियाई ?अपने हँसैत बजल खिन हं रौ बेसिए व्यस्त भय गेल छलहूँ आब ओकरा पुछ्ल्खिन तोहर की हाल-चाल ?कह लागल ,हुजुर ,ठिक्के हाल हई,एक्को गो बाल-बच्चा लग में नहि हई बेटी त ससुरे बसई हई ,आ तीनू बेटा दिल्ली कमाई हई तखन ,कहलखिन बाज कतेक पैसा किराया लेबही ओ कहलकनी , बेसी नईलेब हुजुर ,खाली पचीसे टा द देब .हम सब रिक्शा पर बईस गेलहूँ .तखन अपने कहलखिन ,अहि बेर त तोहर किराया दुन्ना बुझाइए ,ओ बाजल,ई सं कम में नहि पोसाए हई . अंगना ,पहुंचला के बाद हम भगवती के गोड़ लागे लेल गेलहुं आ अपने माय के प्रणाम केला के बाद कहलखिन ,-जौं,दू कौर भात छौक त अहि रिक्सावाला के परसि दहीं हम शहर आ गामक अंतर करय लगलहुं.आई जाही शहर में हम पचीस -तीसबरख सं रहिरहल छि शायदे कोनो रिक्शावाला या एहने कोनो अन्य आहां के व्यक्तिगत रूप सं चिन्हैत हैत. छोट शहर में त तैयो ठीक छैक पैघ शहर में त आहां सिर्फ नंबर सं जानल जाई छि ,लोकक भीढ़ में सिर्फ एक चेहरा बस .अपन जिंदगी भरि के कमाई सं जौं आहां एक टा विशाल मकान बनैयो लैत छि त ताहि सं की ,नगर निगम द्वारा आहां के एक टा नया नंबर द देल जाईया, दू चारी टा अड़ोसी- पडोसी किछु मित्र परिचित ,परिजन के बुझेतई ,यएह की नई? आब आहां सोचु की अगर अपन गाम पर जौं आहां ओहने मकान बनबैत छि त लागत त कम लगबे करत ,ओही पूरा इलाका में आहां अपन मकान सं चिन्हल जायब अपना गाम घर दिश अखनो लोग सुन्दर पैघ मकान कम्मे बनबैत छैक -मिथिलाक गाम जन शुन्य भेल जा रहल अछि ,प्रायः इ देखल जा रहल छैक जे ,जौं एक बेर गाम छोड़ी क बहरा गेला से फेर घुरि क गाम बसै लेल नहि अबैत छैत. हम समस्त मैथिल जन सं आग्रह करैत छियैन ,जे ओ सब फेर घुरि क अप्पन गाम आबिथआ ओत्तही बसिथ .अप्पन मिथिलांचल में आहां के स्वागत अछि .....

gam gharak log

ओना त हमर सासु गामे में रहैत छथिन. कहियो कल तीर्थ -वर्त के क्रम में दस -पंद्रह दिनक लेल अबैत छथिन .मुदा किछुए दिन बाद हुनका गाम जाए लेल छटपटाबय लागैत छनि. किएक त हुनकर गामक असार-पसार ,अचार -अदौड़ीक ,काज मोन पड़ लागैत छनि . कहितो छथिन . कनिया ये ,हमरा सबके अपने ठाम पर अधिक मोन लागैत अछि. ओहि ठाम हम भरि दिन व्यस्त रहैत छी . सही बात छैक ,ओतय मंदिर-पोखरि,पूजा -पाठ ,फूल लोढनाइ ........इत्यादि छोटकी कनिया भानस नहिओ करय दैत छथिन तैयो किछु ओरियन पाती ,सागे बिछ नाइ ,सजमनि बनेनाइ ,यैह करैत छथिन .दिन कोन बाते बीत जीत छैक ,नहि बुझाइत छैक अहि ठाम आहां के छोट गृहस्थी ,गैस परका भानस .ओ ने हमरा कहिओ ओरियैत आ ने आहां सब हमरा किछु करय देब .तखन ल द क टी .भी . से कत्ते देखू ?गप्पे कत्ते करू ? तैं , हमरा अपन ठाम पर रहय दैत जाऊ . परुका होली में जे गाम गेल छलियैक त छोटकी कनिया बाजलखिन ,माय के कहिओ काल घुरमा लगी जैत छनि .कतबो मना करैत छियनि ओ भोरे अन्हारे फूल लोधय लै चलिए जैत छथिन .हम सब अंदाज केलियैक जे हुनका सुगर बढ़ी गेल हेतनि अथवा ब्लड -प्रेशर के शिकायत भ गेल छनि . जे हुए हुनका एखन डेरा पर ल अन्लियनी ,आब देखा चाही ओ कतेक दिन टिकैत छथि .

मंगलवार, 21 अगस्त 2012

maugiyahi khissa.

वामा -विचार ,अर्थात  मौगियाही गप्प ! पुरुख सब दलान पर मौगियाही गप्प कहि  क बहुत बात  के भले ही मजाक में उड़ा देथि  लेकिन मौगियाही गप्प होइत छैक बड़ रसगर !

                       अहि बेर जे छईठ में गाम  गेल छलहूँ  त  सासु हमरा आन बेर सं अधिक अमोट देलखिन .आन बेर एक्कही धडिका  भेटैत  छल ,अहि बेर त दू  टा भेटल ! पुछलियनी ...माय यै ,अहि बेर आमो त तेहन कोनो नहिये फरल छलनि ,तखन हमरा अतेक रास अमोट कोना दईत छथिन ? ओ  कहलखिन  आहां चुपचाप राखि    
लिय  ने आहां  के धिया -पुता  के अमोट  बड़  नीक लगैत  छैक   से हमरा  बुझल  अछि . ओ  सब  खूब  प्रेम सं खायत . ई  लोक  सब आब  बड़का  लोक  भय  जाई गेल  अछि , एहन  सब चीज  ई सब नहि  खाई जैत .
                                            अपने चारि भाय  छथिन .  तीन भाय शहर में नौकरिहारा छी  .एक गोटा गामही
में रहि  क  खेती -बाड़ी  क  काज सम्हारैत छथिन . सासु  अधिकतर गामे में  रहैत  छथिन  कनिया  सं  बेसी  काल  हुनकर  टोना -मेनी  होइते  रहैत  छानि .
                                                  हम  एकांत  में जा  क  कनिया  सं  पुछलियनी .  ऐं  यै   अहि  बेर  एतेक  अमोटक  सौगात  हमरे  कियैक ? आहां  सब  लै  किछु  बांचल  की नहि ?   सुनतहि  त  जेना  हुनका  लेस  देलकनी   ओ  मुह  चमका  क  बजली , धुर  जाउथ , एहन  अमोट  के  खाइया   सड्लाहा  आम  के  कारी 
खोर्नाट  अम्मट  ,ओहि  पर  भरि  दिन माछी  भिनकैत  रहैत छैक  .से अलग .    हमर  त  कोनो  बच्चा  ओहन  
अमोट  के छूबो  नहि  करतनि  .कहीं  ओकरा  खेला  सं  मोने  ने  खराब  भय  जाई .....आ   कि  दन्न  सं  हमर सासु   सामना  में आबि  क  गरजय  लग्ल्खिन  अएँ  यै  रामपुर वाली  ,आहां  सत्ते  कहू  त  आम  सड़ल  छल? 
तखन  ओहि  दिन  आहां  मन्ग्ल्हू  कियैक ?    बुझ्लियेइ  बडकी  कनिया  ,कोन  नतीजा  सं  ई  अमोट  हम बनौलहूँ  से  हमही  बुझैत  छी  ,सबटा  आम  के  धोनाई ,कुटनाई  ,गारा बनेनाई , छन्नाई  त  एकसर  हाथे  करबे  करैत  छी , लेकिन  एक  दिन  अचानक  में जे  पानि -बिहाड़ी  आबि  गलैक   त  हम  शोर  पाड़ैत -पाड़ैत  रहि  गेलहुँ   लेकिन  टी .भी .वाला घर  सं  ने  ई  बहरेली  आ  ने  हिनकर  कोनो  संतान  .  हम    कोना  ओहन  भारी  खटिया  के  घिसिया  क  ऊपर  अनलहूँ  से  हमही  बूझैत  छियैक  .एखन धरि  हमर  डांध 
दुखैत  अछि .   तखन जे  हमरा सं  अमोट मंगती  त  हम  बजबो  नहि  करू ?   ठीके  त  कहलियैक    जखन  सुलवाई  होई  छौक  त  बौआ  हमरे  अमोट  काज दैत  छौक  ,आ  फलाहार  काल में  की  कोनो  फौल  भेट्बो 
करैत छौक  तखन  त  यैह अमोट फुला -फुला  क  खाई छहक  .ई सब  सुनबा  में  दाईजनि  के  बड  खराब  लगैत  छनि  ....../कनिया  ,आहां  ई  अमोट  निश्चिंत  भ  क  लय  जाऊ .     तखन  ओ  सप्पथ  खा  क  कहलखिन  जे  ई अमोट  ओ  मच्हड़ दानी  सं  झंपि  क  सुखेने  छतिन .