शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

चुनाव क्षेत्र सं वार्तालाप -लाइव !

चुनाव क्षेत्र  सं वार्तालाप -लाइव !
हे यौ .कत् छी ?
अस्पतालक जतरा में..
एं ?आहाँ त कहि क गेल छलहुं इलेक्सन ड्यूटी में जा रहल छी .हे ,भोला बाबा .सब ठीक होई .
ठीक की रहत ,सरकार इलेक्सन  करवाबय क लेल एक टा ट्रेक्टर देने अछि  ,ओहि पर चढल  धकर-धकर चलल जा रहल छी .बुझि पडैत अछि सबटा हड्डी पसली चूर भ जायत.तखन अस्पताले जाय पड्त की ने ?
कनी कालक बाद .
हे यौ पहुँचलौं?
हँ ,पहुँचलहुं .पहुँच गेलहुं.  की बात?
ओत् भोजनक की व्यवस्था थिक?
की कहू ,जों आहाँ  संग में ,सतुआ भरल परोठा नही दितौं  त बुझू .भुक्ले प्राण छुईट  जाईत् .
यौ ,ओना ने बाजू .तखन सुतय के इन्तिजाम सरकार किछु केने अछि?
अहूँ क्खनो क बिखे बजैत छी .सरकारक   बेटाक  बीयाह छैक  की ? ई सरकारी इस्कूल छैक , दस टा बेंच जोड़ी क कहूना सुतय  के प्रयास करब .कोनों तरहे राति बीत जाय ..भोरे त  बुझैया चाहो पर आफत !
हे प्रभु .जतेक सरकारी नौकरी में दई ने  छी ,दुईये दिन में सबटा असुइल लईत  छी .
ई उचित नहि करैत छी .

बुधवार, 12 मार्च 2014

के छथि आम आ के छथि खास !

हम सब हुनका खास बनाबय चाहलियानी मुदा ओ त आमे रहय चाहैत छथि !कियैक त ओ सब सत्ता में ऐला के बाद कुर्सीक लेल ओहिना मारि केलखिन जेना आम नेतागण .  तखन सवाल ई छैक जे के छथि आम आ के छथि खास?

जखन तक आहाँ अप्पन दफ्तर में छी, आम जन सं घूस लईत छी. लोग सं दुर्व्यवहार करैत छी ताबे तक अपना के खास बुझि सकैत छी. जों आहाँ पुलिस में छी त वर्दी पहिरने अपना के खास बुझैत छी .मुदा जहिना आहाँ अप्पन वर्दी उतार्ल्हूँ तखन हमहू आम छी आ अहूँ .अहूँ के बेटी सं त  छेड़ -छाड होइते हैत ,ट्राफिक जाम [जे पुलिसक लापरवाही सं होइत छैक] टकरा सं अहूँ के दिक्कत होइते हैत. त अप्पन काज नीक जकां करू ने. छेड़खानी करय वला के ताकि क मारब से त नई उलटे तकर विरोध करय वला पर आहाँ के लाठी खूब बजडईया. एक तरफ पाईन् बिजलिक कनेक्सन में घूस लईत छी दोसर तरफ अहूँ के काज बिनु देने त नहिये होइत हैत. त कियैक ने हम सब आमे बनि क रही ?


दू चारि दिन पहिने एक टा सरकारी स्कूल में जेबाक अवसर भेटल, जाड़क समय, सब शिक्षक गण आगि लहका क तापि रहल छलाह. बुझि पडल ओ स्कूले के फर्नीचर छ्लई, जे होई  हम पुछलियनि, आहाँ लोकनिक बच्चा सब कतय पढ़ैत अछि? ओ सब गर्व सं एक टा कौन्व्वेंट स्कूलक नाम कहली. हम एतबा टा कहलियैक जों अहू स्कूल के शिक्षक के अहिना जाड होई त ?

बुधवार, 5 मार्च 2014

आउ मनाबी महिला -दिवस !


आन बेरक जकां फेर महिला दिवस आबि गेल ! आब ई त बुझले अछि जे ,लोग -बाग महिला सब के बधाई दई जेथिन  कोनों संस्था क तरफ सं विशिष्ट महिलागन के पुरस्कार ,गुलदस्ता क आदान-प्रदान  कयल जेतैक .बस ! समाज अपन कर्तव्यक इतिश्री मानि जाईत  अछि .
                                          
दरअसल महिला दिवस कोनों एक दिन अथवा ,एक वर्ष मनाबय वला पर्व नही अछि ,ई त सतत चलय वला एकटा विचार -व्यवहार हेबाक चाही .हम सब एक दिनक लेल महिला दिवस मना त लईत छी ,मुदा दोसरे दिन सं बल्कि ओहो दिन ओहिना महिला सब  प्रताड़ित  होई छथि ,दहेज हत्या ,बलात्कार ,वैश्यावृति,में कोनों कमी नहि देखल गेल अछि .बल्कि दिनों दिन महिलाक प्रति अपराध ब्ध्ले जा रहल अछि ..तखन उपाय कोन?
                     
अपन देशक कानून महिला सब के बराबरि क  अधिकार द चुकल छैक मुदा ओहि कानून के व्यवहार में लाबयक  प्रयास  केनाई त हमरे सभक कर्तव्य थिक .समाज में एखनो महिला के दोयम दर्जा देल जाईत अछि .बेटी के नेनपने सं सिखैल जाईत अछि  जे ओ पुरुख सं हीन छैक . बुच्ची दाई पढाई में कतबो कुशाग्र किये न्
होथि  !अंग्रेजी  स्कूल में बुचने के नाम लिखाओल जाईत छैक .संगहि ट्यूशन सेहो! .घर में जों माछ रान्हल गेल त माछक मूडा हुनके परसाई छनि बेचारी बुच्ची दाई  के पूछीये सं संतोष करय पड़ईत छनि. {{ई शोधक विषय हेबाक चाही जे  पईघ भेला पर वैह बुच्ची दाई ,अप्पन बेटी संगे ओहने व्यवहार कियैक करैत छथि }

एखनो युवा लड़की के सबसं अधिक संघर्ष अपने घर सं करय पडैत छैक .माय ,पितियाईन  दादी ,सब ओक्कर पहिरब ओढब ,बात -विचार ,कत्तौ गेनाई-एनाई ,सब पर आपत्ति करैत छथिन. कियैक ने हम महिला सब अप्पन बेटी सब के एहन माहौल दी ,जाहि में ओ अप्पन व्यक्तित्व के सर्वांगीन विकास क सकय,अप्पन भविष्यक सपना साकार करय .सही मायने में महिला दिवस तखने सार्थक होयत.

नीता झा  
भागलपुर
08051824576

शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

बदलइत जीवनशैली

 प्रचंड गरमिक समय ,बच्चा सब गर्मी छुट्टी बितयबाक लेल आयल अछि. ओना  ,अनदीना त हमही दुनु गोटे रहैत छि .हमरा सबहक नियमित दिनचर्या ,संयमित भोजन आ बहुत संछिप्त दायरा रखने छी.जखन सं बच्चा सब पढ़ लिखय लेल बाहर रहय लागल ,हम सब जेना वीतरागी भय गेल छि. ने खेबाक विन्यास ,ने कत्तहु जेबाक उत्साह.पाबनियो तिहार मनेबा क उमंग नहि होइत अछि.शुरू शुरू में मारे चीज वस्तु सब बना बना क पठबैत छलिये .बाद में ओ सब मना करय लागल. आब ओ सब उम्हरके जीवनक अभ्यस्त भय गेल अछि घरक बनायल चीजक आकर्षण आब ओतेक नहि होइत छैक.ई बात हमरा तखन बुझैल जखन तीन चारि दिन रहला के बादे कहलक
जे, मम्मी हमलोग रोज रोज एक ही तरह का खाना खाते खाते बोर हो गए हैं .आज क्यों न कुछ नया बनाया जाए? ताहि पर हम कहलिये ,बौआ रे ,हमरा  ओ  रंग बिरंगक बिदेसी चीज बनब त नहि अबैत अछि ,ऐना करय, बाहरे कत्तहु कियैक ने खा लैत छहक ?ओ कहलक ,तुम चिंता क्यों करती हो मम्मी ,आज नास्ता हम बनाएंगे. तुम तो बस आराम से सोफे पर बैठ कर टी.वी. देखो !और हाँ !
किचन में बिलकुल मत आना .मुदा हमर ध्यान त भंसेघर दिस छल. नहि जानि छौंडा
की करैत हैत?कहियो चाहो त नहि बनब देलियैक .कही नून हाथे चिन्नी ने छू देने होए.
कहीं झरकिये ने जाए, अंततः एक घंटा क उपरांत ,प्लेट परसि क अनलक. धामे पसीने तर ,कहलक लो  फ्रेंच टोस्ट खाओ और खा के बताओ कैसा बना है? चाय भी बन गयी है ,अभी लाते हैं.हम धडफड़ाइत भनसाघर दिस गेलहुं.चूल्हा पर एक दिस अमनिया तौब 
पर अंडा बनौने छल,आ दोसर चूल्हा पर चाह बरकैत छल हम माथ पीट लेलाहूँ .अंडा के बगल में चिन्नी क डब्बा राखाल छल ,अवश्ये छुयैल हेते ओ पाछां सं आबि क हमरा बाहिं सं पकड़ी क दोबारा पुछलक बताओ तो कैसा बना है .हम कहलियैक ,बेटा आब हमरा भरोस भ गेल तोरा जीवन में भोजनक कष्ट कहियो नहि हेतउ  !.  .


रविवार, 25 अगस्त 2013

अनभिज्ञ मैथिल युवा वर्ग !


रवि दिन अरुण बाबू ओहिठाम ,गेल छलहुं .ओहो दुनू गोटे अपने इलाकाक छथि.अर्थात दरभंगा-मधुबन्नी .बहुत दिन बाद भेंट भेल छल, तैं गपक सिलसिला थोड़े विस्तार सं चलल .थोड़े काल  बाद ओही गोष्ठी में अन्नू जी सेहो शामिल भ गेली हुनकर पतिदेव चौधरी जी ताहि दिन शहर में नहि छलखिन ,हुनकर कमी हम सब अनुभव केलहुं .हम सब प्रायः ओही वर्ग सं अबैत छी जे अपना दुनुगोटे त आपस में मैथली में बजैत छी मुदा जखन बच्चा सब सं गप करैत छी त हिंदी पर उतरि आबैत छी !हमरा आश्चर्य होइत अछि ,आखिर ई प्रवृति पनपल कोना ?प्रायः हर शहरी मैथिल यैह करैत अछि हं दरभंगा-मधुबनी इत्यादि मिथिलांचल सं सटल इलाका क् युवा अवश्ये मैथली बजैत होथि मुदा आन ठाम त रेवाजे  यैह छैक !बच्चा सभके आचार –विचार ,संस्कार देनहार त हमही सब छी चूक त हमरे सब सं भेल ! जे बच्चा एक टा  विदेशी भाषा के तेहन फर्राटा सं बजैत अछि जे की अंगरेजवा सब बाजत! तखन अप्पन भाषा कियैक नहि ?
              ओहि गोष्ठी में एकटा इहो प्रश्न उठलई जे हम मैथिल सब अपना आप के बड काबिल आ विलक्षण प्रतिभावान मानैत छी .की आनो लोग ई बुझैत अछि ? की अपने मुंह मियां मिठू के गईत त नहि अछि?हमरा सभक संतानों के कोनों मैथिल विद्वान के  जानकारी छनि की नहि ? अहि गप पर अरुण बाबू क् कनिया अप्पन बेटी के सोर पाडलखिन ,निक्की सं कोनों मैथिल साहित्यकारक् नाम पूछल गेल ,ओ चट द विद्यापति जी क् नाम लेली .दोसरे नाम पर बेचारी आकाश ताकय लगली .ताहि पर हमरा एकटा प्रसंग मोन पडल जे एक बेर दिल्ली में हमर बेटी सं नौकरी क् इंटरव्यू क् दौरान मातृभाषा  मैथली कहला पर हुनका जखन कोनों साहित्यकारक नाम पूछल गेलनि त ओ विद्यापतिक नामक बाद किछु नहि फुरेलई त अपन नानाजिक नाम कहि देलथि .हुनकर इंटरव्यू में चयन भ गेलनि [.अहि सं ई त साबित भइये गेलई जे मैथिलक प्रतिभा  विलक्षण होइत अछि !] मुदा असल समस्या त यैह छैक जे ,आम मैथिल के सेहो ,मैथली क कोनों साहित्यकार वा ख्यात व्यक्तिक जानकारी नहि छैक .ओ सब विद्यापति के चीनहियै कियैक त ओ हुनकर कोर्स में छलनि .अन्नू जी ,के कहब छनि जे चूँकि हम सब अपन भाषा ,अपन साहित्यकार ,अपन संस्कृति के ओही तरहे प्रचार नहि केलियैक तैं आम मैथिल अनभिज्ञ अछि.बात सही लागल एखन टेलीविजन पर  कखनो गुजरात आ कखनो केरल के बारे में जे प्रचार देखबैत छैक, अपन मिथिलांचल की कोनों तरहे कम छैक ? अपन सभक लिखिया क प्रचार भेल त देखियौ ,मधुबनी पेंटिंग देश के कहै विदेश तक में झंडा गाड़ी रहल अछि !
         आवश्यकता अछि हम सब एहन प्रयास करी जे आम मैथिले नहि ,आनो लोक हमरा सभक समृद्ध संस्कृति ,साहित्य ,साहित्यकार  के चिह्न्हय.जय मैथिल ,जय मिथिला !

रविवार, 14 जुलाई 2013

नव पीढ़ी


प्रचंड गरमिक समय ,बच्चा सब गर्मी छुट्टी बितयबाक लेल आयल अछि. ओना  ,अनदीना त हमही दुनु गोटे रहैत छि .हमरा सबहक नियमित दिनचर्या ,संयमित भोजन आ बहुत संछिप्त दायरा रखने छी.जखन सं बच्चा सब पढ़ लिखय लेल बाहर रहय लागल ,हम सब जेना वीतरागी भय गेल छि. ने खेबाक विन्यास ,ने कत्तहु जेबाक उत्साह.पाबनियो तिहार मनेबा क उमंग नहि होइत अछि.शुरू शुरू में मारे चीज वस्तु सब बना बना क पठबैत छलिये .बाद में ओ सब मना करय लागल. आब ओ सब उम्हरके जीवनक अभ्यस्त भय गेल अछि घरक बनायल चीजक आकर्षण आब ओतेक नहि होइत छैक.ई बात हमरा तखन बुझैल जखन तीन चारि दिन रहला के बादे कहलक
जे, मम्मी हमलोग रोज रोज एक ही तरह का खाना खाते खाते बोर हो गए हैं .आज क्यों न कुछ नया बनाया जाए? ताहि पर हम कहलिये ,बौआ रे ,हमरा त ओ  रंग बिरंगक बिदेसी चीज बनब त नहि अबैत अछि ,ऐना करय, बाहरे
 कत्तहु कियैक ने खा लैत छहक ?ओ कहलक ,तुम चिंता क्यों करती हो मम्मी ,आज नास्ता हम बनाएंगे. तुम तो बस आराम से सोफे पर बैठ कर टी.वी. देखो !और हाँ !
किचन में बिलकुल मत आना .मुदा हमर ध्यान त भंसेघर दिस छल. नहि जानि छौंडा
की करैत हैत?कहियो चाहो त नहि बनब देलियैक .कही नून हाथे चिन्नी ने छू देने होए.
कहीं झरकिये ने जाए, अंततः एक घंटा क उपरांत ,प्लेट परसि क अनलक. धामे पसीने तर ,कहलक लो  फ्रेंच टोस्ट खाओ और खा के बताओ कैसा बना है? चाय भी बन गयी है ,अभी लाते हैं.हम धडफड़ाइत भनसाघर दिस गेलहुं.चूल्हा पर एक दिस अमनिया तौब 
पर अंडा बनौने छल,आ दोसर चूल्हा पर चाह बरकैत छल हम माथ पीट लेलाहूँ .अंडा के बगल में चिन्नी क डब्बा राखाल छल ,अवश्ये छुयैल हेते.तखने ओ पाछां सं आबि क हमरा बाहिं सं पकड़ी क दोबारा पुछलक बताओ तो कैसा बना है .हम कहलियैक ,बेटा आब हमरा भरोस भ गेल तोरा जीवन में भोजनक कष्ट कहियो नहि हेतहू .

मंगलवार, 4 जून 2013

एखन सुति  क  उठले छलहुं  की अँगना  सं जोर -जोर सं  ककरो बाजय  के आवाज  सुनलिये .ओतय गेला पर ,देखलिये ,बडकी बहिन खूब तमसैल छलखिन .पुछलियनि ,की बात ?कोन    कारने अतेक  तम्सैल छथिन ?ओ ,ओहिना त्मसैत कह  लाग्ल्खिन , मै  गे मै ,अहि गाम  में  डनियाही  मउगी  के कोनो  कमी नहि  छैक .सब  हमरा सब सं जरय  जाई  छैक .से हम कोना बुझलिये  त ! किछु दिन पहिने ,सुधिया  के बोखार  धेल्कै ,त ,सुधिया  माय  हमरा सं ,बोखार  नपना  (थर्मामीटर ) मांगि  क लय  गेल छल .दितीये  ने कोना ?आखिर लोको त  बुझौक  जे हमरा सब लग कोन  सब चीज  रहैत  छैक .आहां  सब केहन -केहन  चीज वस्तु  आनि  क  हमरा दैत  छियै .मुदा  ओइ मउगी  के  कारनामा देखियौ  .भरले बोखार  थर्मामीटर  हमरा  घुरौलक  अछि ! जे  की  हिनको  सब के वैह  बिमारी  भ जाई . हम हुनका  हाथ सं  थर्मामीटर लय  क कौल  लग  जा  क  जोर सं  थर्मामीटर  के झाडी  देलियैक  आ कहलियानी  हे यै  ,हम एकरा  में  भरल  सब  टा  बोखार  नाली  में  क  बहा  देलियनि  आब चिंताक  कोनो  बात नहि .तथापि  ओ कनी  काल  तक बड़बडैत  रहल्खिन .